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Delhi state regulator will now take strict action against black marketing of drugs

Wednesday July 15, 2020 at 8:18 am

नई दिल्ली : फार्मास्युटिकल्स विभाग (department of pharmaceuticals (DoP)) ने एक तरफ जहां, रेमेडिसविर के निर्माताओं से कहा है कि वे एंटीवायरल के उत्पादन में तेजी लाएं। वहीं दूसरी तरफ, राज्य के अधिकारी दवाओं की कालाबाजारी की शिकायतों से परेशान हैं।

दरअसल, इस बीच दिल्ली राज्य नियामक ने केमिस्ट के संघ को पत्र लिखकर कहा है कि उन जमाखोरों को कारावास सहित सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी जाए, और कोविड -19 उपचार के लिए निर्धारित दवा की कालाबाजारी को बंद कराया जाएं। बात दें कि, DoP सचिव ने पिछले शुक्रवार को राज्य के दवा नियंत्रकों द्वारा महामारी में मुनाफाखोरी की कई शिकायतें मिलने के बाद दवा निर्माताओं के साथ बैठक की।

क्या आप जानते हैं कि सरकार ने इन दवा की कीमतों को ₹4,000 से 5,400 तक रखा है, लेकिन इन दवाओं को ₹60,000 के उच्च स्तर पर बेचा जा रहा है। आखिर सवाल तो ये है कि इस महामारी में ये धोखाधड़ी क्यों?

वैसे, अगर आगे इस बात पर चर्चा की जाएं, तो एक अधिकारी ने ईटी को बताया, “यह एक प्रिस्क्रिप्शन दवा है, लेकिन इसकी कालाबाजारी की शिकायतें बहुत मिल रही हैं। हम भी मानते हैं कि इस महामारी में गलत तरीके से पैसा कमाना गलत है। हालांकि, यह एक तरल पदार्थ की स्थिति है। वहीं, हमने निर्माताओं से कहा है कि हम उनके उत्पादन के लिए सरकार की मदद चाहते हैं, तो ही हम उन्हें सभी आवश्यक सहायता प्रदान कर पाएंगे।”

यूएस-आधारित गिलियड के रेमेडिसविर को सिप्रेमी द्वारा सिप्ला, कोविफॉर और हेटेरो नाम से बेचा गया, जिसकी कीमत क्रमशः भारतीय बाजार में ₹4,000 और ₹5,400 है। वहीं, माइलान भी 22-24 जुलाई के आस-पास रेमेडिसविर को लॉन्च करेगा।

वहीं, दिल्ली के राज्य नियामक ने केमिस्ट एसोसिएशन को कोविड से संबंधित दवाओं के अवैध आयात के बारे में भी लिखा है, जिसमें बांग्लादेश से remdesivir, favipiravir और tocilizumab की दवाओं पर कालाबाज़ारी के लिए नियंत्रण और लाइसेंसिंग प्राधिकरण को लेकर कार्यालय के प्रमुख अतुल नासा को उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए कहा गया है।

रेमेडिसविर दवा की कथित कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए, ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने राज्य के दवा नियामकों और राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA)) को प्रयोगात्मक कोविड -19 दवा की अधिकतम खुदरा कीमत लागू करने के लिए कहा है।

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया वीजी सोमानी द्वारा यह कार्रवाई स्थानीय कालेज से एक पत्र प्राप्त होने के बाद हुई, जो कथित कालाबाजारी पर शासन और सामुदायिक सहभागिता के लिए समर्पित एक सोशल मीडिया साइट है।

वैसे, 6 जुलाई को लिखे गए पत्र में, लोकल क्रिकल्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन तपारिया ने स्वास्थ्य मंत्रालय सहित सरकारी संगठनों से अपील की थी कि मरीजों को कोविड की दवा खरीदने के लिए भुगतान किए जाने वाले उच्च मूल्य की जांच की जाए।

ये सब सुनकर ये कहना गलत नहीं होगा कि महामारी में जिस तरह से लाखों की जाने जा रही हैं, और जिस तरह से पूरी दुनिया दवाओं को बनाने में लगी है। कहीं न कहीं इस संघर्ष के बीच इस तरह की कालाबाज़ारी के चलते फार्मा इंडस्ट्री पर से लोगों का भरोसा कम न हो जाए।